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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 32
चरितार्थविकाशाच्व रक्षणादपि पार्वति । नरनारीस्वरूपाच्च चरणं कथितं प्रिये ॥
हे पार्वति! चरित के रहस्य को प्रकाश करने से, रक्षा करने से और हे प्रिये। नर नारी का स्वरूप होने से 'चरण' कहलाता है।
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