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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 21
वीतरागमदक्लेशकोपमात्सर्यमोहतः । रजस्तमोविदूरत्वाद्वीर इत्यभिधीयते ॥
राग (आसक्ति), मद (अहंकार), क्लेश, क्रोध, मात्सर्य, मोह से वीत (रहित) होने से और रज, तम गुणों से दूर रहने के कारण 'वीर' कहा जाता है।
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