सङ्ग से होने वाले दुःख का त्याग करने से, यत्र कुत्र (जहाँ कही) आश्रम बनाकर रहने से, मिघ अर्थात् गुप्त रूप से अपनी आत्मा का अनुसन्धान (साक्षात्कार) करने से 'संयमी' कहा जाता है।
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