भव (संसार) बन्धन को शान्त करने से, टकार अर्थात् इन्दु (चन्द्र) शेखर होने से और रक्षा करने से तथा कमनीय (सुन्दर) होने के कारण 'भट्टारक' कहा जाता है।
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