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कुलार्णव • अध्याय 17 • श्लोक 13
श्रीमोक्षज्ञानदातृत्वान्नादब्रह्मात्मबोधनात् । स्थगिताज्ञानचिह्नत्वात् श्रीनाथः कथितः प्रिये ॥
श्री समृद्धि एवं मोक्ष ज्ञान को देने से, नादब्रह्म और आत्मतत्त्व का बोध कराने से, और हे प्रिये! चित्त से अज्ञान को स्थगित (दूर) करने से 'श्रीनाथ' कहा जाता है।
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