इति ते कथितः किञ्चित् काम्यकर्मविधिः प्रिये ।
समासेन कुलेशानि कि भूयः श्रोतुमिच्छसि ॥
इस प्रकार हे प्रिये! मैंने काम्यकर्म की कुछ विधि संक्षेप में आपसे कही। अब हे कुलेशानि! आप क्या सुनना चाहती है?
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।