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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 93
अनिष्टकारिणः सत्त्वान् कलहायासकारिणः ॥ वृथा द्वेषकरान् क्रूरान् सपर्याविघ्नकारिणः । भूतोपग्रहवेतालान् पिशाचान् यक्षराक्षसान् ॥ इत्यादिदुष्टजन्तूंश्च सदा क्लेशकरान् परान् । तद्वह्निमध्यपतितान्निर्दग्धांश्च चिन्तयेत् । क्षणेन नाशमायान्ति शलभा इव पावके ॥
अनिष्टकारी प्राणियों, कलह एवं कष्टदायक और व्यर्थ ही द्वेष करने जाले क्रूर लोगों, पूजा में विघ्न डालने वाले भूत, उपग्रह, वेताल, पिशाच, यक्ष, राक्षस आदि सदा कष्टदायक, दुष्ट जीवों को उक्त अग्नि के मध्य में गिर कर भस्म होते हुये चिन्तन करे। इससे क्षण भर में वे वैसे ही नष्ट हो जाते हैं, जैसे पतङ्गे अग्नि में भस्म होते हैं।
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