अनिष्टकारी प्राणियों, कलह एवं कष्टदायक और व्यर्थ ही द्वेष करने जाले क्रूर लोगों, पूजा में विघ्न डालने वाले भूत, उपग्रह, वेताल, पिशाच, यक्ष, राक्षस आदि सदा कष्टदायक, दुष्ट जीवों को उक्त अग्नि के मध्य में गिर कर भस्म होते हुये चिन्तन करे। इससे क्षण भर में वे वैसे ही नष्ट हो जाते हैं, जैसे पतङ्गे अग्नि में भस्म होते हैं।
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