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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 92
स्वयं कालानलसमः सर्वभूतभयङ्करः ॥ दक्षिणाशामुखो भूत्वात्युग्रदृष्टिमलीमसः । यौवनोल्लाससहितः पराप्रासादसंज्ञकम् ॥ मन्त्रं मण्डलकं जप्यादष्टोत्तरसहस्रकम् ।
साधक स्वयं महाप्रलय की कालाग्नि के समान सब प्राणियों के लिये भयङ्कर होकर दक्षिण की ओर मुख कर अत्यन्त उग्र दृष्टि के साथ, यौवनोल्लास सहित, पराप्रासादसंज्ञक मन्त्रमण्डल का १००८ जप करे।
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