आत्मरक्षां पुरा कृत्वा पश्चात् कर्माणि साधयेत् ।
योऽन्यथा कुरुते मोहात् स भवेद्देवतापशुः ॥
आत्मरक्षा पहले कर ले, तब कर्म साधन करे। मोहवश जो ऐसा नहीं करता, वह देवता का पशु होता है।
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