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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 88
शान्तिके सात्त्विकं देवि श्वेतवर्णं विचिन्तयेत् ॥ वश्ये तु राजसं देवि रक्तवर्णं विचिन्तयेत् । तामसं क्रूरकार्येषु कृष्णवर्णं विचिन्तयेत् ॥
हे देवि! शान्ति कर्म में सात्त्विक श्वेत वर्ण का, वश्य कर्म में राजस रक्त वर्ण का, और हे देवि! क्रूर कर्म में तामस कृष्ण वर्ण का ध्यान करे।
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