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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 80
कदम्बाशोकवकुलपुन्नागाप्रमधूकजैः ॥ चम्पकद्वयपालाशपाटल श्रीकपित्थकैः । मालतीमल्लिकाजातिबन्धुकारुणपङ्कजैः ॥ कल्हारारुणमन्दारयूथिकुन्दजवादिभिः । सनारिकेलकदलीद्राक्षेक्षुपृथुकैरपि चन्दनागुरुकर्पूर रोचनाकुंकुमादिभिः ॥ रक्तैरन्यैः शुभद्रव्यैः समिधृतफलोद्धवैः ॥ पूर्ववज्जुहुयाद्देवि विधिवन्मन्त्रवित्तमः ।
कदम्ब, अशोक, वकुल (अगस्त), पुन्नाग, आम, मधूक (महुआ), चम्पकद्वय, पलाश, पाटल (पाढर), श्री (बेल), कपित्थ (कैथा), मालती, मल्लिका (बेला) जाति, बन्धूक, अरुण कमल, कहलार, अरुण मन्दार, यूथि, कुन्द, जवा, नारिकेल, कदली, द्राक्षा, इक्षु, पृथुक, चन्दन, अगुरु, कपूर, रोचना, कुङ्कुम और अन्य तथा रक्त एवं शुभ द्रव्य आदि समिधा, पत्रपुष्प फलादि द्वारा, हे देवि! मन्त्रज्ञ पूर्ववत् विधिवत् हवन करे।
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