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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 8
काम्यप्रयोगकर्तृणां परलोको न विद्यते । प्रयोगसिद्धिरेवैषां फलमन्यन्न तु प्रिये ॥
हे प्रिये! काम्य प्रयोग करने वालों का मोक्ष नहीं होता। उन्हें अपने प्रयोगों में सिद्धि मिलती है, यही उनकी सफलता है।
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