इससे तत्क्षण ही सभी रोग, उन्माद, अपस्मार, यक्ष्माजन्य उत्पात और समस्त दुःख नष्ट हो जाते हैं, इसमें सन्देह नहीं। हे प्रिये! इससे सभी प्रकार की शान्ति, ज्ञान और विद्या का लाभ होता है।
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