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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 79
सर्वरोगव्रणोन्मादापस्मारोत्पातयक्ष्मजम् । सर्वदुः खप्रशमनं तत्क्षणान्नात्र संशयः ॥ अनेन सर्वशान्तिञ्च ज्ञानं विद्यां लभेत् प्रिये ।
इससे तत्क्षण ही सभी रोग, उन्माद, अपस्मार, यक्ष्माजन्य उत्पात और समस्त दुःख नष्ट हो जाते हैं, इसमें सन्देह नहीं। हे प्रिये! इससे सभी प्रकार की शान्ति, ज्ञान और विद्या का लाभ होता है।
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