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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 73
ग्रहवेगादिदुष्टानां विनाशनकरं प्रिये । अस्मात् परतरं ध्यानं नास्ति सत्यं न संशयः ॥
हे प्रिये! ग्रहों के कोप, रोगों और दुष्टों का विनाश करने वाले ध्यान से श्रेष्ठ अन्य नहीं है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं।
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