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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 68
भूतापमृत्युरोगाद्या विनश्यन्ति न संशयः । त्रिलौहे वापि भूर्जे वा लिखित्वा यन्त्रमुत्तमम् ॥ विधृतं बाहुना देवि सर्वरक्षाकरं भवेत् । आयुरारोग्यमैश्वर्यं विद्यालाभं यशो जयम् ॥ यद् यत् स्वमनसोऽभीष्टं तत्तदाप्नोत्यसंशयः ।
भूतबाधा, अकाल, मृत्यु, रोगादि इसके प्रभाव से दूर होते हैं, इसमें सन्देह नहीं। त्रिलौह या भोजपत्र में उत्तम यन्त्र को बाहु में धारण करे, तो हे देवि! वह सब प्रकार से रक्षा करता है और आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य, विद्यालाभ, यश और विजय जो-जो अभीष्ट होता है, उसकी प्राप्ति होती है, इसमें सन्देह नहीं।
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