कलशों में विधिवत् अस्थि, रक्त, शिरा, तन्तु, मिट्टि रूप मांस और चर्म वस्वादि से युक्त, रुधिररूप जल और प्राणप्रतिष्ठा मन्त्र से प्रतिष्ठित कलश देवताओं और उनके अङ्ग देवताओं एवं भैरवों के सहित माताओं का तथा हे प्रिये! विदिशाओं में गणेश, दुर्गा, क्षेत्रपाल आदि का पूजन कर सभी पापों की शान्ति के लिये कलशस्थ जल से प्रिय शिष्य का अभिषेक करे।
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