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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 61
सर्ववश्यकरं देवि सर्वैश्वर्यफलप्रदम् । अस्मात् परतरं ध्यानं नास्ति सत्यं न संशयः ॥
हे देवि! यह सभी वश्य कर्मों को सिद्ध करने वाला एवं सभी ऐश्वर्यों का फल देने वाला है। इस ध्यान से श्रेष्ठ ध्यान अन्य नहीं है, यह सत्य है, इसमें सन्देह नहीं।
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