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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 59
महदैश्वर्यमाप्नोति स्वर्गभोगादिकं प्रिये । यस्य मूर्ध्नि स्मरन् जप्यात् स वश्यो जायते हठात् ॥
हे प्रिये! (ज़प से) साधक महान् ऐश्वर्य और स्वर्गीय भोगादि को प्राप्त करता है। मस्तक में जिसका स्मरण करते हुये जप किया जाता है, वह शीघ्र ही वश में हो जाता है।
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