हे प्रिये! (ज़प से) साधक महान् ऐश्वर्य और स्वर्गीय भोगादि को प्राप्त करता है। मस्तक में जिसका स्मरण करते हुये जप किया जाता है, वह शीघ्र ही वश में हो जाता है।
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