इस विधान से देव, दानव, गन्धर्व, सिद्ध, किन्नर, गुह्यक, विद्याधर, मुनि, यक्ष, नाग, अप्सराएँ, स्त्रियाँ, सिंह, व्याघ्र, सर्प आदि और अन्य सभी दुष्ट पशु भी साधक के वशीभूत हो जाते हैं, फिर साधारण मनुष्यों की क्या बात है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।