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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 55
द्वादशाधारपद्येषु द्वादशस्वरसंयुतम् । बीजं सञ्चिन्तयेद् यस्तु स भवेदजरामरः ॥ षडाधारेषु षड्‌दीर्घयुक्तं बीजं विचिन्तयेत् । षडाधारस्थदेवीभिः पूज्यते कुलनायिके ॥
बारह आधार पद्मों में बारह स्वरों से संयुक्त बीज का ध्यान करने से साधक अजर अमर होता है। छः आधारों में, छः दीर्घ स्वरों से युक्त बीज का ध्यान करने से हे कुलनायिके! उन आधारों में स्थित देवियों द्वारा साधक पूजित होता है।
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