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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 52
दशेन्द्रियेषु यो ध्यायेल्लभेदिन्द्रियसौष्ठवम् । यत्र बीजं स्मरेत्तत्र तत्फलं भवति ध्रुवम् ॥
दसों इन्द्रियों में जो ध्यान करता है, उसकी इन्द्रियाँ सुसंयत हो जाती है। जहाँ बीज का स्मरण किया जाता है, वहीं वैसा फल निश्चय ही होता है।
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