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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 50
अश्रुतं बुध्यते शास्त्रं कविता निर्मला भवेत् । चिन्मयो जायते साक्षान्त्रात्र कार्या विचारणा ॥
अश्रुत शास्त्र को वह समझ लेता है, निर्मल कविता रचने लगता है और साक्षात् चिन्मय हो जाता है, इसमें सन्देह नहीं।
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