मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 5
गन्धपुष्पाक्षताकल्पधनवस्त्रादिभिः प्रिये । भक्ष्याथोन्यान्नपानाद्यैर्हव्यद्रव्यैर्मनोहरैः ॥ तोषयेद् योगिनीचक्रं यथाविभवविस्तरम् ।
हे प्रिये! गन्ध, पुष्प, अक्षत मनः संकल्पित धन एवं वस्त्र आदि भक्ष्य एवं भोज्य अन्न तथा पानादि और अन्य मनोहर हव्य द्रव्यों से यथाशक्ति विभव एवं विस्तार के साथ योगिनी चक्र की पूजा करना चाहिए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें