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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 41
स्वगृहे शान्तिकर्म स्याद्वश्याद्यं चण्डिकालये । सर्वकार्यं देवगृहे श्मशाने क्रूरकर्म च ॥
शान्तिकर्म अपने घर में, वश्यादि देवी मन्दिर में, सभी कार्य देवालय में और क्रूर कर्म श्मशान में करे।
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