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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 4
दशांशं जुहुयाद्देवि संस्कृते हव्यवाहने । दशांशं तर्पयेहुग्धैः सलिलैः शालितण्डुलैः ॥
हे देवि! (अग्नि संस्कार से) संस्कृत हव्यवाहन में (जप संख्या के) दशांश से होम करना चाहिए और उसके दशांश से दुग्ध, जल एवं शालि के चावल (अक्षत) से तर्पण करे।
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