होम और तर्पण में 'स्वाहा', न्यास और पूजन में 'नमः' का प्रयोग मन्त्र के अन्त में करना चाहिए। साधक को जपकाल में परिस्थिति के अनुसार इनका प्रयोग करना चाहिये।
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