मन्त्री विशुद्धहृदयः पूर्वोक्तनियमान्वितः ।
श्रीप्रासादपरामन्त्रं तत्त्वलक्षं जपेत् प्रिये ॥
हे प्रिये! मन्त्र साधक विशुद्ध हृदय से पूर्वोक्त (पूर्व के सभी उल्लसों में कहे गए) नियमों से युक्त होकर 'श्री प्रासाद परामन्त्र' का पाँच लाख जप करे।
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