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कुलार्णव • अध्याय 16 • श्लोक 17
तथैवासनदिग्बन्धनाडीबन्धादिसङ्गतिम् । देवताकालमुद्रादि ज्ञात्वा कर्माणि साधयेत् ॥
इसी प्रकार आसन, दिग्बन्ध, नाडी बन्धादि, तत्त्व सङ्गति, देवता, काल एवं मुद्रादि को जानकर कर्म सिद्ध करे।
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