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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 95
जपात् श्रान्तः पुनर्ध्यायेद्ध्यानात् श्रान्तः पुनर्जपेत् । जपध्यानादियुक्तस्य क्षिप्रं मन्त्रः प्रसिध्यति ॥
जप से थक कर पुनः ध्यान करे। ध्यान से थक कर पुनः जप करे। इस प्रकार जप ध्यान से युक्त रहने वाले साधक को शीघ्र ही सिद्धि मिलती है।
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