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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 94
तन्निष्ठस्तद्गतप्राणस्तच्चित्तस्तत्परायणः । तत्पदार्थानुसन्धानं कुर्वन् मन्त्रं जपेत् प्रिये ॥
हे प्रिये! इष्टदेव में निष्ठा, उन्हीं में प्राण, उन्हीं में चित्त, उन्हीं के तत्त्व चिन्तन में लगा हुआ जप करे।
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