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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 93
सुगन्धिपुष्याभरणवस्त्रादिभिरलङ्कृतः । तस्य हस्तगता सिद्धिर्नान्यस्य जपकोटितः ॥
सुगन्धि, पुष्प, आभूषण और वस्त्रों से अलंकृत साधक के हाथ में सिद्धि रहती है। अन्य को कोटि जप से भी सिद्धि नहीं मिलती।
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