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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 82
वादार्थ पठ्यते विद्या परार्थं क्रियते जपः । ख्यात्यर्थं दीयते दानं कथं सिद्धिर्वरानने ॥
हे वरानने! विवाद के लिए विद्या पढ़े, दूसरे के लिए जप करे, ख्याति के लिए दान दे, तो हे वरानने! सिद्धि कैसे मिले?
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