मन्त्रसिद्धोपदिष्टेषु चतुराम्नायजेषु च ।
मालामन्त्रेषु देवेशि सिद्धादीन्त्रैव शोधयेत् ॥
हे देवेशि! इसी प्रकार सिद्ध पुरुष के द्वारा उपदिष्ट, चारों आम्नायों से उत्पन्न और मालामन्त्रों के सम्बन्ध में सिद्धादि का शोधन न करे।
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