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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 78
एकाक्षरे तथा कूटे त्रैपुरे मन्त्रनायिके । स्त्रीदत्ते स्वप्नलब्धे च सिद्धादीन्त्रैव शोधयेत् ॥
हे मन्त्रनायिके! एकाक्षरमन्त्र, कूटमन्त्र, त्रिपुरामन्त्र, स्त्री द्वारा दिए गए मन्त्र और स्वप्न में प्राप्त मन्त्र के सम्बन्ध में सिद्धादि का विचार न करे।
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