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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 76
वाय्वग्निभूजलाकाशाः पञ्चाशल्लिपयः क्रमात् । पञ्च ह्रस्वाः पश्च दीर्घा बिन्द्वन्ताः सन्धिसम्भवाः । कादयः पश्चशः षक्षसहान्ताश्च प्रकीर्त्तिताः ॥
अकार से क्षकार पर्यन्त ५० वर्षों को ५ भागों में विभक्त करना चाहिए। प्रत्येक भाग एक-एक पृथ्वी आदि तत्त्वों को सूचित करता है। इनका विभाग इस प्रकार होगा - १. वायु - अ आ ऐकचटतपय व. २. अग्नि - इ ई ए ख छ ठ थफरक्ष, ३. पृथ्वी - उ ऊ ओ गज ड द व लळ, ४. जल - ऋऋऔघ झढ ध भवस, ५. आकाश - लू लू अंङञण न म श ह।
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