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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 74
स्वराशेर्मन्त्रशश्यन्तं गणनीयं विचक्षणैः । अज्ञाते राशिनक्षत्रे नामाद्यक्षरराशितः ॥
बुद्धिमान् साधक राशि चक्र में गणना अपनी राशि से आरम्भ करे, अर्थात् अपनी राशि जिस गृह में हो वहाँ से गणना का आरम्भ होता है। यह गाना मन्त्र की राशि तक की जाती है। यदि अपनी राशि अज्ञात हो तो गणना अपने नाम की राशि से प्रारम्भ की जाती है।
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