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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 70
प्राप लोभा पटु प्राह्यं रुद्रस्याद्रिरुरुः करम् । लोक लोप पटुः प्रायः खलोघोभेदिताः प्रिये । वर्णाः क्रमात् स्वरान्तौ तु रेवत्यंशगतौ तदा ॥
अश्विनी से लेकर रेवती तक २७ नक्षत्रों के चक्र में रखने का वर्णों को रखने का क्रम- प्राप - २, १ अ। लोभा ३, ४ = आ। पटु-१, १ उ। प्राह्यं -२, १ अद्रि-२। रुद्र-२, २ अः। करम् - १, २ लोप -३, १। पटु-१, १। प्राह्य - १, १। ख लो घो-२, ३, ४। अर्थात् २, १, ३, ४, १९ १, २, १, २, २, १, २, २, १, २, ३, १, ३, १, १, १, २, १, २, ३, ४ इन २६ गृहों में अकारादि स्वरों और व्यञ्जन वर्णों को रखना चाहिए। किन्तु २७ वें गृह में ल, क्ष, अं, अः- इन चार वर्णों को रक्खे।
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