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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 67
अरिसिद्धः सुतं हन्यादरिसाध्यस्तु योषितम् । तत्सुसिद्धः कुलं हन्ति स्वात्मानं हन्ति तद्रिपुः ॥
१३. 'अरि-सिद्ध' पुत्र का, १४. 'अरि-साध्य' पत्नी का, १५. 'अरि-सुसिद्ध' कुल का और १६. 'अरि-अरि' अपनी आत्मा (स्वयं) का नाश करता है।
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