९. 'सुसिद्ध सिद्ध' आधे जप से, १०. 'सुसिद्ध-साध्य' यथोक्त जप से, ११. 'सुसिद्ध-सुसिद्ध' ग्रहण मात्र में सिद्ध होता है। १२. 'सुसिद्धारि' अपने वंश का नाशक होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।