मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 65
साध्यसिद्धोऽतिसंक्लेशात् साध्यसाध्यो निरर्थकः । साध्यसुसिद्धो भजनात् साध्यारिहन्ति गोत्रजान् ॥
५. 'साध्य-सिद्ध' कठिनाई से सिद्ध होता है। ६. 'साध्य-साध्य' मन्त्र का जप व्यर्थ होता है। ७. 'साध्य सुसिद्ध भजन करने से सिद्ध होता है और ८. 'साध्यारि' के जप से वंशजों का नाश होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें