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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 61
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन परान्नं वर्जयेत् सुधीः । पुरश्चरणकाले च काम्यकर्मस्वपीश्वरि ॥
अतः हे ईश्वरि! पुरश्चरणकाल में और काम्य कर्मों में भी विद्वान् साधक प्रयत्न करके पराए अत्र को न ग्रहण करे।
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