मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 60
यस्यान्नपानपुष्टाङ्गः कुरुते धर्मसञ्चयम् । अन्नदातुः फलं चार्द्धं कर्तुश्चाद्धं न संशयः ॥
जिसके अन्न, पान आदि से शरीर पुष्ट होकर धर्म का सञ्चय करता है, उस अन्नदाता को साधक के कर्म का आधा फल मिलता है, इसमें कदापि सन्देह नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें