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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 6
आब्रह्मबीजदोषाश्च नियमातिक्रमोद्भवाः । ज्ञानाज्ञानकृताः सर्वं प्रणश्यन्ति जपात् प्रिये ॥
नियमों के अतिक्रमण और ज्ञान अज्ञान में किये गये कर्मों से उत्पत्र जन्म जन्मान्तर के सभी दोष 'जप' से नष्ट हो जाते हैं।
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