मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 58
कथ्यन्ते दश संस्कारा मन्त्रदोषहराः प्रिये । जननं जीवनं पश्चात्ताडनं बोधनं ततः ॥ अभिषेकोऽथ विमलीकरणाप्यायने तथा । तर्पणं दीपनं गुप्तिः संस्काराः कुलनायिके ॥ शाणोल्लोढानि शस्त्राणि यथा स्युर्निशितानि वै । मन्त्राश्च स्फूर्त्तिमायान्ति संस्कारैर्दशभिस्तथा ॥
हे प्रिये! हे कुलनायिके! मन्त्रदोषों को दूर करने वाले दस संस्कार ये है - १ जनन, २ जीवन, ३ ताडन, ४ बोधन, ५ अभिषेक, ६ विमलीकरण, ७ आप्यायन, ८ तर्पण, ९ दीपन एवं १० गुप्ति । सान पर चढ़ाने से जैसे शस्त्र तेज धार वाले होते है, वैसे ही इन दस संस्कारों से मन्त्र स्फूर्ति को प्राप्त करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें