हे प्रिये! हे कुलनायिके! मन्त्रदोषों को दूर करने वाले दस संस्कार ये है - १ जनन, २ जीवन, ३ ताडन, ४ बोधन, ५ अभिषेक, ६ विमलीकरण, ७ आप्यायन, ८ तर्पण, ९ दीपन एवं १० गुप्ति । सान पर चढ़ाने से जैसे शस्त्र तेज धार वाले होते है, वैसे ही इन दस संस्कारों से मन्त्र स्फूर्ति को प्राप्त करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
कुलार्णव के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
कुलार्णव के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।