हे कुलेश्वरि! किन्तु चैतन्ययुक्त मन्त्र का एक बार भी उच्चारण करने से हृदय में कम्पन, ग्रन्थिभेद, सभी अङ्गों में वृद्धि, आनन्दाश्रु, पुलक, देहावेश, गद्गद् वाणी आदि का अचानक ही अनुभव होता है। इसमें संशय नहीं। इस प्रकार के लक्षण दिखने पर समझे कि मन्त्र परम्परा से प्राप्त है।
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