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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 54
मन्त्रोच्चारे कृते यादृक् स्वरूपं प्रथमं भवेत् । शतैः सहस्त्रैर्लक्षैर्वा कोटिजापेन् तत् फलम् ॥
मन में एक बार मन्त्र के उच्चारण करने से उनका जैसा प्रभाव पहले होता है, वैसा ही प्रभाव शत, सहस्त्र, लक्ष या कोटि जप करने पर भी होता है।
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