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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 52
सुप्तबीजाश्च ये मन्त्रा न दास्यन्ति फलं प्रिये । मन्त्रा चैतन्यसहिताः सर्वसिद्धिकराः स्मृताः ॥
हे प्रिये! जिन मन्त्रों के बीज सुप्त हैं, वे फल नहीं देते। चैतन्य मन्त्र ही सर्वसिद्धिप्रद कहे गए हैं।
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