भोग और मोक्ष के सङ्कल्प से, कल्प और व्रत से 'जप' शुभदायक होता है। 'जप' और ध्यानमय होने से ही योग होता है। अतः हे देवि! वैसा विधिपूर्वक आचरण करे।
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