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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 5
भोगापवर्गसङ्कल्पकल्पव्रतशुभो जपः । जपध्यानमयं योगं तस्माद्देवि समाचरेत् ॥
भोग और मोक्ष के सङ्कल्प से, कल्प और व्रत से 'जप' शुभदायक होता है। 'जप' और ध्यानमय होने से ही योग होता है। अतः हे देवि! वैसा विधिपूर्वक आचरण करे।
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