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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 47
उच्चैर्जपोऽधमः प्रोक्त उपांशुमध्यमः स्मृतः । उत्तमो मानसो देवि त्रिविधः कथितो जपः ॥
हे देवि! जप तीन प्रकार का कहा गया है - १. उच्च स्वर से जप अधम है, २. उपांशु जप मध्यम कहा गया है, और ३. मानस जप उत्तम है।
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