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कुलार्णव • अध्याय 15 • श्लोक 44
त्रिंशद्धिः स्यान्द्धनं पुष्टिः सप्तविंशतिभिर्भवेत् । पञ्चविंशतिभिर्मोक्षं पञ्चदश्याभिचारके । पञ्चाशद्धिः कुलेशानि सर्वसिद्धिरुदीरिता ॥
३० मणियों की माला से धन, २७ मणियों की माला से पुष्टि, २५ मणियों की माला से मोक्ष और १५ मणियों की माला से अभिचार होता है। हे कुलेशानि! ५० मणियों की माला से सर्वसिद्धि होती है।
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